अस्थिरता का समय है संभल ले तू
जीवन का विषय है खुद को बदल ले तू
भटक मत तू सटक मत तू
और दुनिया के प्रहार से चटक मत तू
दीया जो दिख रहा है वही जाना है तुझे
इस प्रतिस्पर्धा की दुनिया में खुद को आजमाना है तुझे
ज्वाला को झोका आएगा जो सीना जला जायेगा
और उस झोके से भी मचल मत तू
मंजिल नजदीक रहेगी तो लोग पूछेंगे
वरना बिन तन ढके भिकारी को सभी कुचेंगे
अपनी मंजिल को पार कर तू
अस्थिरता का समय है संभल ले तू ...
जीवन का विषय है खुद को बदल ले तू
भटक मत तू सटक मत तू
और दुनिया के प्रहार से चटक मत तू
दीया जो दिख रहा है वही जाना है तुझे
इस प्रतिस्पर्धा की दुनिया में खुद को आजमाना है तुझे
ज्वाला को झोका आएगा जो सीना जला जायेगा
और उस झोके से भी मचल मत तू
मंजिल नजदीक रहेगी तो लोग पूछेंगे
वरना बिन तन ढके भिकारी को सभी कुचेंगे
अपनी मंजिल को पार कर तू
अस्थिरता का समय है संभल ले तू ...
No comments:
Post a Comment